शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले
वतन पर मिटने वालों का येही बाकी निशाँ होगा
They see things and ask... Why? I dream Dreams and ask... Why Not?
महोबत एक ऐसे रोग की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है..
यहाँ सब लोग कहते है की मेरे आँखों में आंसू है..
जो तू समझे तो मोती है जो न समझे तो पानी है..
बहुत टूटा बहुत बिखरा थपेड़े सह नही पाया..
हवाओं के इशारो पर, मगर मैं बह नही पाया...
अधूरा अनसुना ही रह गया यह प्यार का किस्सा...
कभी तू सुन नही पार्यी कभी मैं कह नही पाया...
भ्रमर कोई कुमदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा...
अभी तक लोग सुनते थे किस्सा महोबत का...
मैं किस्से को हकीकत में बादल बैठा तो हंगामा...
समुन्दर पीर का अन्दर है लेकिन रो नही सकता...
यह आंसू प्यार का मोती, इसे मैं खो नही सकता...
मेरी चाहत को तू दुल्हन बना लेना मगर सुनले..
जो मेरा हो नही पाया वोह तेरा हो नही सकता...
स्वयम से दूर हो तुम भी.... स्वयम से दूर है हम भी...
बड़े मशहूर हो तुम भी...बड़े मशहूर है हम भी..
बड़े मगरूर हो तुम भी... बड़े मगरूर हो तुम भी..
आतः बड़े मजबूर हो तुम भी.. बड़े मजबूर है हम भी...